कुदरत के साथ जीवन :-
आज की इस दौड़ धाम भरी जिंदगी में हम जीना ही भूल गए है । आज हम सिर्फ पैसो के लिए ही जी रहे है। भौतिक सुख के पीछे हमारे जीवन का उदेश्य ही हम भूल चुके है।
कुदरत में हमने जन्म लिया है। कुदरत ने हमारे खाने का, पिने का, रहने का, सबका ख्याल रखा है । फिर भी हम उसको समजने का प्रयत्न ही नहीं करते । मेरा यह मानना है की "कुदरत है तो हम है" ।
हमारी हर जरूरियात कुदरत ने पूर्ण की है फिर भी हम उसके लिए एक बार भी नहीं सोचते । इसीलिए हम दुखी है।अगर हमें सुखी होना है तो हमें कुदरत के साथ जीना चाहिए ।
इससे पहले की पोस्ट देखिए
http://jivanekaanand.blogspot.in/
- नरेन्द्रसिंह झाला
आज की इस दौड़ धाम भरी जिंदगी में हम जीना ही भूल गए है । आज हम सिर्फ पैसो के लिए ही जी रहे है। भौतिक सुख के पीछे हमारे जीवन का उदेश्य ही हम भूल चुके है।
कुदरत में हमने जन्म लिया है। कुदरत ने हमारे खाने का, पिने का, रहने का, सबका ख्याल रखा है । फिर भी हम उसको समजने का प्रयत्न ही नहीं करते । मेरा यह मानना है की "कुदरत है तो हम है" ।
हमारी हर जरूरियात कुदरत ने पूर्ण की है फिर भी हम उसके लिए एक बार भी नहीं सोचते । इसीलिए हम दुखी है।अगर हमें सुखी होना है तो हमें कुदरत के साथ जीना चाहिए ।
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